ये पहला आंदोलन है जो कानून क्रियान्वयन में नहीं उसके लिए आंदोलन हो रहा है: Dr Sudhanshu Trivedi

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SC के स्थगन आदेश के बाद ये कानून क्रियान्वयन में नहीं है, ये पहला आंदोलन है जो कानून क्रियान्वयन में नहीं उसके लिए आंदोलन हो रहा है: Dr Sudhanshu...

Posted 9 months ago in Politics

Shiv Darshan Bhatnagar 9 months ago

इन दंभियों को किसान नेता कहना शोभा नहीं देता यह किसान और नेता दोनों का घोर अपमान है। इनकी बे सिर पैर की बेवकूफाना और दंभ भरी बकवास सुनकर इनके लिए स्वयंभू किसान नेता या तथाकथित किसान नेता या फिर प्रायोजित किसान नेता जैसे शब्दों का संबोधन ज्यादा उचित होगा।

Javed Lone 9 months ago

जो लोग इसे केवल किसानों की लड़ाई के रूप में मान रहे हैं,
उन्हें अपनी आँखों को तीनो कृषि बिल्लो में से दूसरे बिल की ओर मोड़ना चाहिए, जो असीम होर्डिंग / जमाखोरी की अनुमति देता है।

क्या होर्डिंग के बाद चैरिटी करेंगे ?
पेट्रोल के दाम पर मोदी की हरामखोरी सभी ने देखी है, अब हर खाद्य पदार्थ के मूल्य वृद्धि की उम्मीद करें।

Karanjeet Kaur 9 months ago

सरदाना रोड जाम से किसी को परेशानी नहीं है ज्यादा होशियार मत बनो
ये जो त्रिवेदी जी बोल रहे है ना आप कोर्ट को नहीं मानते संसद को नहीं मानते
इसके जिम्मेदार भी आप खुद ही हैं जब सुप्रीम कोर्ट के जज आकर बोलने लगे कि लोकतंत्र खतरे में है।
जज को आप राज्यसभा का पद दे दिए।प्रधानमंत्री हर रैली से झूठ और जुमला बोले तो कैसे कोई आप पर विश्वास करें संसद में बिना बहस के कानून पास कर लेंगे बिना किसानों से राय मशवरा किए तो आपकी बात का किसान कैसे भरोसा करेगा?

Nirmal Sharma Nirmal Sharma 9 months ago

रोहित सरदाना सरकार सिर्फ दो राज्यों की नही है। पूरे हिन्दुस्तान कि है। यदि पूरे देश के लोग आराम से सो रहे है। तो फ़िर इन दो राज्यों के किसानों कि निंद के पिछे सारे देश के लोगों की निंद खराब करने का न तो इन खालिस्तानी दलालों को अधिकार हे, न दलाल मिडिया संस्थाओं को, इसलिए सरकार को भी आराम से अपना काम करने दो, और देश को भी शांति से रहने दो,

Bheru Lal Soni 9 months ago

किसान घर को जाना चाहिए जाना ही चाहिए पर आंदोलनजीवी उन्हें ऐसे जाने देनेवाले नही क्योंकि जिस उद्देश्य के लिये इतना पैसा मोदीविरोधीयो ने खर्च किया उसका लाभ उसका सार निकला नही तो उन्हें कैसे घर जाने दिया जायेगा कौन जाने देगा इस.आंदोलन मे समस्या ये है। किसान लोग भी इन नेताओं की चालचरीत्र समझ नही रहे या समझने की चेष्टा नही कर रहे है यह भी समझ से परे ही बात है। असली किसानभाई आगे आये सरकार से वार्तालाप करके देशहित मे कोई सुलहसमझौता करले ओर अपने घरो मे लौट जाये। मोदीजी जैसा नेता देश को वापिस मिलना दुर्लभ है मुश्किल है अंहकार छोड़े देशहित निर्णय करे। राम राम राम।

Bhanu Tripathi 9 months ago

यदि किसान का मुद्दा ही आधारहीन है तो 12 दौर की वार्ता का मतलब क्या था।ये वार्ता किस उद्देश्य से की गई और क्यों की गई।और जब किसान 102 दिनों से सड़क पर है 230 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है जिस पर सरकार की ओर से एक बयान नही और अभी तक हल नही तो ये किस प्रकार की संवेदना है? त्रिवेदी महाराज

Harihar Kumar 9 months ago

वहम् तूझ़को अजब़ है ऐ जम़ाल-ए-कम़नूआँ,जैसे सबकुछ़ हो मग़र तू दीद् के काब़िल ना हो??भारतीय जलव़ा पार्टी,मुर्द़ाबाद़!!

Bablu Somkuwar 9 months ago

हिटलर ने कितने देशों को बर्बाद कर दिया उसको नींद कैसे आती थी बस उसी तरह इनको समझे मित्रों

Madan Sharma 9 months ago

Sudhansu this agitation is not only two states public can’t be made fool for a long period. These laws are just like emergency declared by Indira Gandhi and it will give a big loss to bjp

Abul Kalam 9 months ago

Rohit Sardana ji kya aapane Keval BJP pravakta ko bolane ke liye Bulaya hai kya aap yah sawal nahin kar sakte the ki agar Kisan andolan ka koi neta nahin hai to Sarkar 8. 10, Daur ki varta kar chuki hai agar hamen pata nahin ke kitne Daud ki ki varta Hui hai tu agar Sarkar ne a Kisan se a baat Kiya hai tu jab koi neta hi nahin tha Kisan ka to kisse baat Kiya Sarkar agar Kanoon mein kuchh galatfahmi nahin thi to itne sanshodhan ke liye kyon taiyar Ho gai Sarkar yah sawal Rohit Sardana ko karna chahie imaandari ke sath kyunki Rohit Sardana bahut achcha anchor hai aur usko apni imandari ka Parichay Dena chahie