Dr Rajeev Singh - 1380636688617243

Dr Rajeev Singh
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जिसकी रक्त-गर्जना गुंजित भारत की तरुणाई में।
जिसका नाम मन्त्र सरीखा पर्वत सी कठिनाई में।
जिसे पृष्ठ पर अंकित करके खुद इतिहास गुमानी है।
जिसके पग-पग का आभारी कण-कण हिन्दुस्तानी है।
केवल देश बहा है जिसकी धमनी और शिराओं में।
आज़ादी के हठयोगी का वन्दन दसों दिशाओं में।
........चौ.मदन मोहन समर

हिन्दू- मुसलमान- सिक्ख- ईसाई अगड़े अथवा पिछड़े के नजरिये से नहीं देश के संकट को देश के नज़रिए से देखिये। कश्मीर हो य नागालैंड हरियाणा हो य झारखंड; नक्सली हों या कोई अन्य। हम जानते हैं कुछ लोग अनजाने में सामुदायिक दायरे में बंध जाते हैं जानबूझ कर नहीं। सरकारे किसी की भी हों पक्ष केवल तीन ही होते हैं एक देश के साथ हर हालत में; एक देश के विरोध में हर हालत में और तीसरा सरकारें देख कर खड़ा हो कि उसे क्या कहना हैऔर हमें हर हालत में देश के पक्ष में होना चाहिए। आइए आर्यश्रेष्ठ चाणक्य की संकल्प शक्ति लेकर सम्राट चन्द्रगुप्त की विजिगीषु वृत्ति अपनाकर, महात्मा बुद्ध की करुणा, तीर्थंकर महावीर का तप और गुरु गोविंद सिंह जी का तेज ह्रदय में धारण कर हमें अन्तर- वाह्य संकटों पर विजय प्राप्त करनी है और भारत को शक्तिशाली तथा समृद्ध बनाकर विश्व में सर्वोच्च स्थान दिलाना है।

Posted 3 years ago in OTHER