Bhala Hua Mori Gagri Phooti - Kabir

Dr. Kumar Vishwas
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शाश्वत, अनहद, अनन्त आनंद! अहा कबीर!
"भला हुआ मोरी गगरी फूटी, मैं पनियां भरन से छूटी
मोरे सिर से टली बला… ।।
भला हुआ मोरी माला टूटी, मैं तो राम भजन से छूटी
मोरे सिर से टली बला… ।।
माला कहे है है काठ की ,कबीरा तू का फेरत मोहे
मन का मनका फेर दे तो तुरत मिला दूँ तोहे
भला हुआ मोरी माला टूटी मैं तो राम भजन से छूटी
मोरे सिर से टली बला… ।।
माला जपु न कर जपूं और मुख से कहूँ न राम
राम हमारा हमें जपे रे कबीरा हम पायों विश्राम
मोरे सिर से टली बला… ।।"

Posted 3 years ago in ENTERTAINMENT