Privatisation, Disinvestment, Asset Monetisation: ये मजबूरी हैं या जरूरी हैं | सत्य वचन

ABP News • 5 months ago   1.4K     577  •  120.2K Views
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Privatisation, Disinvestment, Asset Monetisation: ये मजबूरी हैं या जरूरी हैं | सत्य वचन

Posted 5 months ago in Politics
Comments
Mahadev Kisku
Mahadev Kisku5 months ago

सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में देने से गरीब दुखियों को काफी कष्ट झेलने पड़ेंगे; पढ़ नहीं पाना; नौकरी नहीं कर पाना; रोजगार नहीं मिलना रोजी-रोटी कमाने का श्रोत ही समाप्त हो जाती है।यह बीजेपी सरकार की नीतियां ही गलत है।
न मजबूरी है और न जरुरी है।
ये पार्टी फंड को मजबूत करने जा रहे हैं।

Samar Khan
Samar Khan5 months ago

BJP htao Desh bachao choro s Desh Ko phir s y gulami ki traf le ja rh hi

Sultan Chand
Sultan Chand5 months ago

पर इस पैसे को सरकार खर्च करेगी या अपनी पार्टी की तिजोरी भरेगी

Sunil Kumar Jaiswal
Sunil Kumar Jaiswal5 months ago

I think you should know better , speaking against is not allegation . Anchor correct herself first .

Rohit Singh
Rohit Singh5 months ago

मोदी जी आपसे विनम्र निवेदन है कि आप हमारी लोक सभा विधान सभा राज्य सभा को किराए पर उठा दे नेता लोगों की प्राइवेट भर्ती कर ले देश का बहुत बड़ा भार कम हो जाएगा

Devendra Gupta
Devendra Gupta5 months ago

Samajh me nahi aa raha hai ki ye sarkar hai ya OLX hai

Mukesh Kumar
Mukesh Kumar5 months ago

Kama ke 6 lakh karod sampatti Jama Karte Baap Dada ki sampatti ko girvi Rakh kar paise Jama kar rahe ho use condition Kho Gaye ghatiya Soch

Saurabh Sachan
Saurabh Sachan5 months ago

सिर्फ दो सवाल। पहला अगर ये entities सरकार के लिए घाटे पर चल रही थी तो ये प्राइवेट को कैसे फायदा पहुँचाएगी और प्राइवेट क्यों इनकी तरफ आकर्षित होगा और दूसरा इसका आम जनता पर क्या असर होगा। ये दोनों बिंदु सरकार को स्पष्ट करने चाहिए

Mdrustam Alli
Mdrustam Alli5 months ago

हमको ये नहीं समझ मे आ रहा हैँ की 6 साल मे लीज पर देंगी तो इसके पहले वाली सरकार साल मे 1 लाख रोजगार रेल मे कैसे देती थी
ओ लोग कैसे थे जो अभीतक भाड़ा नहीं बढ़ाये थे
ये सब घंटा बजाने के अलावा कुछ नहीं आता हैँ

इनको देश चलाना नहीं आता हैँ जय जय जय,,,,,,,,,

Tapas Dey
Tapas Dey5 months ago

Jab sab kuch bech dena hai Tab desh me sarkar ka vi koi jarurat nahi hai